रुद्राक्ष | Rudraksh

रुद्राक्ष | Rudraksh

रुद्राक्ष | Rudraksh यानि रुद्र+अक्ष, रुद्र अर्थात भगवान शंकर और अक्ष यानी आंसू। माना जाता है भगवान शिव की आंखों से पानी की कुछ बूंदें भूमि पर गिरने से महान रुद्राक्ष पैदा हुआ। इसके बाद भगवान शिव की आज्ञा से पेड़ों पर रुद्राक्ष फलों के रूप में प्रकट हो गए।

शिव पुराण के अनुसार शिवजी के प्रतीक रुद्राक्ष को पहनने से ही भक्त के सभी दुःख दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। रुद्राक्ष को चंद्रमा का कारक रत्न माना गया है। इसलिए एकाग्रता के लिए भी  इसे पहना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार रुद्राक्ष एक तरह का फल है। इसमें अनेक औषधीय गुण मौजूद है। रुद्राक्ष को धारण करने से या इसे पानी में कुछ घंटे रखकर उस पानी को ग्रहण करने से दिल से संबंधित बीमारियां दूर होती है व मानसिक रोगों के साथ ही नसों से जुड़े रोग भी खत्म होते हैं। साथ ही, याददाश्त में भी बढ़ोतरी होती है।

रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन शिवपुराण, रुद्रपुराण, लिंगपुराण, श्रीमद्भागवत गीता में मिलता है। रुद्राक्ष को भगवान शिव का पूर्ण प्रतिनिधित्व प्राप्त है। चंद्रमा शिवजी के मस्तक पर सदा विराजमान रहता है, अतः चंद्र ग्रह जनित कोई भी कष्ट हो, तो रुद्राक्ष से दूर हो जाता है।

किसी भी प्रकार की मानसिक उद्विग्नता, रोग एवं शनि के द्वारा पीड़ित चंद्र अर्थात साढ़े साती से मुक्ति में रुद्राक्ष अत्यंत उपयोगी है। शिव सर्पों को गले में माला बनाकर धारण करते हैं। अतः काल सर्प जनित कष्टों के निवारण में भी रुद्राक्ष विशेष उपयोगी होता है।

मगर, आजकल हर शहर, हर बाजार में रुद्राक्ष की दुकानें हैं। हालांकि, इसकी पहचान करना बहुत ही कठिन है। एक मुखी व एकाधिक मुखी रुद्राक्ष महंगे होने के कारण नकली भी बाजार में बिक रहे हैं। जानिए कैसे कर सकते हैं असली और नकली रुद्राक्ष की पहचान…

कैसे करें असली रुद्राक्ष | Rudraksh की पहचान

1. रुद्राक्ष की पहचान के लिए रुद्राक्ष को कुछ घंटे के लिए पानी में उबालें यदि रुद्राक्ष का रंग न निकले या उस पर किसी प्रकार का कोई असर न हो, तो वह असली होगा। इसके अलावा आप रुद्राक्ष को पानी में डाल दें अगर वह डूब जाता है तो असली नहीं नहीं नकली।

2. रुद्राक्ष सरसों के तेल मे डालने पर रुद्राक्ष अपने रंग से गहरा दिखे तो समझो वो एक दम असली है।

3. प्रायः गहरे रंग के रूद्राक्ष को अच्छा माना जाता है और हल्के रंग वाले को नहीं। असलियत में रूद्राक्ष का छिलका उतारने के बाद उस पर रंग चढ़ाया जाता है। बाजार में मिलने वाली रूद्राक्ष की मालाओं को पिरोने के बाद पीले रंग से रंगा जाता है। रंग कम होने से कभी- कभी हल्का रह जाता है। काले और गहरे भूरे रंग के दिखने वाले रूद्राक्ष प्रायः इस्तेमाल किए हुए होते हैं, ऐसा रूद्राक्ष के तेल या पसीने के संपर्क में आने से होता है।

4. रूद्राक्ष की पहचान के लिए उसे सुई से कुरेदें। अगर रेशा निकले तो असली और न निकले तो नकली होगा।5. नकली रूद्राक्ष के उपर उभरे पठार एकरूप हों तो वह नकली रूद्राक्ष है। असली रूद्राक्ष की उपरी सतह कभी भी एकरूप नहीं होगी। जिस तरह दो मनुष्यों के फिंगरप्रिंट एक जैसे नहीं होते उसी तरह दो रूद्राक्षों के उपरी पठार समान नहीं होते। हां नकली रूद्राक्षों में कितनों के ही उपरी पठार समान हो सकते हैं।

रुद्राक्ष की खेती

रुद्राक्ष मूलतः एक जंगली फल है, इसकी पैदावार समुद्र तल से लगभग दो हजार मीटर तक की ऊंचाई वाले पर्वतीय व पठारी क्षेत्रों में होती है।

इसकी पैदावार हेतु उष्ण व सम शीतोष्ण जलवायु एवं 25 से 30 डिग्री सेल्सियस का तापमान अनुकूल माना गया है। इसी कारणवश रुद्राक्ष के वृक्ष समुद्र तल से 2000 मीटर तक की ऊंचाई पर पर्वतीय व पठारी क्षेत्रों तथा नदी या समुद्र के तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।

भारत में रुद्राक्ष मुखयतः हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों, बंगाल, असम, बिहार, मध्यप्रदेश एवं अरुणाचल प्रदेश के जंगलों, सिक्किम, उत्तरांचल में हरिद्वार, गढ़वाल एवं देहरादून के पर्वतीय क्षेत्रों तथा दक्षिण भारत के नीलगिरि, मैसूर और अन्नामलै क्षेत्र में पाए जाते हैं। उत्तरकाशी में गंगोत्री-यमुनोत्री क्षेत्र में भी रुद्राक्ष पाए जाते हैं।

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